नींद खुली सपने बिखर गये, पर यारों...
रात के अंधेरे दूर ना होते, तो कितने फसाद होते....
भगवान कि चरणोंमें चढाने फुल खील गये, पर मेरे यारों...
वो महकना छोड देते, तो कितने फसाद होते....
आँसू भरी नजर कुछ कह गयी, पर मेरे यारों...
वो बहेना छोड देते, तो कितने फसाद होते....
सवाल जिंदगीके शराबमें डूबोते है, मेरे यारों,
समंदर शराब के होते, तो कितने फसाद होते....
मैं, मेरे अपनों कि चाहतमें इन्सानियत भूल जाते है लोग...
सबके सुख कि " विश्वप्रार्थना " ना होती, तो कितने फसाद होते....
सब फसाद मिटाने कि सोचनेवालों सबको, " शुभ प्रभात "
विठ्ठल घाडी , चारकोप
९१६७७५५२०३
रात के अंधेरे दूर ना होते, तो कितने फसाद होते....
भगवान कि चरणोंमें चढाने फुल खील गये, पर मेरे यारों...
वो महकना छोड देते, तो कितने फसाद होते....
आँसू भरी नजर कुछ कह गयी, पर मेरे यारों...
वो बहेना छोड देते, तो कितने फसाद होते....
सवाल जिंदगीके शराबमें डूबोते है, मेरे यारों,
समंदर शराब के होते, तो कितने फसाद होते....
मैं, मेरे अपनों कि चाहतमें इन्सानियत भूल जाते है लोग...
सबके सुख कि " विश्वप्रार्थना " ना होती, तो कितने फसाद होते....
सब फसाद मिटाने कि सोचनेवालों सबको, " शुभ प्रभात "
विठ्ठल घाडी , चारकोप
९१६७७५५२०३
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