Wednesday, January 27, 2016

शुभ प्रभात सत्तावीस जानेवारी दोन हजार सोळा

रात के अंधेरेमे लाखो चमकते तारे हमने देखे...
तोडकर उन्हें कदमो बिछानेके वादे भी कर देखे....

एक तारा हाथ न लगा, सुबह कि धूप में सब खो गये.....
दुनिया कि रंगमंचपर चलते इंसानोसे हँसना भी हम भूल गये....

सितारोंको जमींपर लाना आसां लगा था, जहां हर एक इन्सान जुडने को बैचेन था...
बस्स अब सितारोंको दूर से हि देखा करेंगे, हर एक को जुडनेका तंत्र हाथ आया था....

नजर के पार कितने तारोंको देखना हम भूले थे...
जिंदगी आसां करनेवाले हाथ कहा हमें याद थे....

सितारोंके साथ अब हम जहां के हर एक को याद करते है,
विश्वप्रार्थना से सबको मांगता हूं,  जिनसे दिनकी शुरुवात करते है.....

🌸  सितारों जैसे चमकनेवालो सबको शुभ प्रभात  🌸

                                    vitthal ghadi charkop
                                      9167755203

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